Why do you rape me?

The world is full of hypocrites, selfish and cruel people; moreover as we are moving along with the new century all we have explored is more of evil and darkness in ourselves. Recent rape, molestation, murders and homicides suggests that we are on the edge of breaking out each and every single cell of goodness … Continue reading

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कॉलेज याद रह गया

कॉलेज याद रह गया लम्हा जो गुजर गया कुछ किस्सों में हमसे बहुत कुछ कह गया कभी बैठते थे उन कमरों में हम पर आज दिल में एक खली कमरा सा ही रह गया कुछ चुलबुली सी शरारते याद रह गयी हस्ते मुस्कुराते अजीब से चेहरे याद रह गए भीड़ में आज खोजते हैं जिन्हें हम हमें एक चेहरे की भीड़ … Continue reading

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एहसास

एहसास अगर अजनबी सा एहसास होता तो मै खुद मै नहीं, शायद मशहूर ग़ालिब होता शब्द अधूरे रख नशे में नूब होता अलफ़ाज़ से जुड़ा एक नायब नूर होता पर यह एहसास तो अपना है बिछड़े दोस्त सा पहचाना एक चेहरा है दर्द की दावा और जैसे अंधे का एक सपना है पिघला हुए चट्टान का टुकड़ा है

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शायद

शायद एहसास अगर होता नहीं तो क्या शब्द बुनता मैं शब्द अगर होता नहीं तो क्या इजहार करता मैं थोड़े से सपने संजोता शायद अंधेरों में उनको टटोलता शायद मिलते कभी और कभी नहीं भी फिर भी एक आस लेके दौड़ता शायद   अरमान अगर होते नहीं तो क्या उम्मीद रखता मैं चाह अगर होती नहीं तो जीने को क्यूँ … Continue reading

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गरीब

कोई साँझ नहीं,कोई सुबह नहीं पहन्ने को एक टुकड़ा नहीं तन ढक तो लूँ पर ढकु तो कैसे जिस्म है पर आत्मा नहीं कपकपाती ठण्ड में जलता यह बदन है आग नहीं, मशाल नहीं कहने को दो शब्द तो है पर कमबख्त मुंह में जुबान नहीं गरीब हूँ में, हाँ में ही एक गरीब हूँ भूका, नंगा, में ही … Continue reading

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धरती (Earth)

हर कण का अंत होता है आखिर इस धरती के लहु का भी एक रंग होता है बेजान खड़े,भले ही बोले न ये धरती उसके सेहेन शक्ति का भी एक अंत होता है कब तक यूँ तलवार चलाओगे काटोगे और खून बहाओगे अब तो बस करो यह खून खराबा सुना था मैंने की हवानियत का … Continue reading

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शब्द

कुछ कह के जब में रुक गया शब्द अपने आप चल दिये दौड़े भागे और इठला के मचल दिये जब रोका मैंने उन्हें तो घबरा के भाग गये रुके मुस्कुराये और फिर हड़बड़ी में दौड़ गये फिर कभी सपने में आये बोले कब तक रोकेगा तू हमें आँख खुली तो मोति बन बिखर गये समेटने … Continue reading

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शक्श

कुछ शब्द अगर में कह पाता कभी तो कहता उस शक्श के बारे में टेढ़ी मेढ़ी है जिसकी चाल वक़्त की जिसने ओढ़ी है एक शाल | बड़ी भुजाओं वाला एक अजीब सा शक्श  है वो मुछों में शान , चेहरे पे सम्मान दिल में अजीब सा बांध  है मजबूत और विशाल है | शौर्य है … Continue reading

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तू कौन है

तू कौन है कभी पूछा वक़्त ने मुझसे की तू कौन है आरंभ है की कहीं तू अंत है जवाब कुछ अधुरा सा ही रह गया ढलती हुई शाम सा मै एक सोच में ही उलझा रह गया कभी ख्याल तो कभी एक खवाब सा अंधेरों में खोया एक शख़्स सा ही रह गया टटोला, समझाया फिर भी जवाब … Continue reading

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उड़ान

थे मोड़ कुछ अजीब से, कुछ सीधे कुछ सजीद से, पंखों पे भारी थी थकान , धीमे से साधी थी मैंने भी एक उड़ान | कुछ दूर चला तो था में शायद, थका था रुका भी था शायद, शाम थी बेरंग सी , चुप सी ,कुछ खामोश सी , थक के जब में बैठ गया, हवा … Continue reading

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