ख़ामोशी

ख़ामोशी की एक जुबान एक बंद आँख और एक खुला असमान इतराते पंख और मतवाली उड़ान वक़्त की एक अनकही थकान Advertisements

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कवी की कविता

कवी की कविता धुंदली सी, सफ़ेद सी ,मटमैली सी कभी गुनगुनाये तो कभी मुश्कुराए छोटे छोटे हजारों सपने दिखाये कभी टूटी नींद सी रात भर जगाये हसाए और फिर जोर से रुलाये रिमझिम बारिश सी इतराए छुईमुई सी कलम देख शर्माए चुपके से कानो में कुछ प्यारा सा शब्द कह जाये फिर जोर से गले लगाये और अपनाये… कवी … Continue reading

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अनकही 4 – (अनकही बातें)

किस्से और किताबे ,न जाने कितनी ही अनकही बातें कभी जुबान पे तो कभी ख्याल में उछलती कूदती और मचलती दिल के मैदान में  |  

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अनकही ३ (Life on ascent)

ज़िन्दगी दौरते हुए  जवानी की सीढ़ी चढ़ गयी रात जैसे सपनो की मेड पे कहीं खो गयी कभी खवाब समेटे तो कभी बातें बनायी हर वक़्त भागते भागते ही न ख़तम होने वाली थकान मिटाई

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तेरी साइकिल मेरी साइकिल

तेरी साइकिल मेरी साइकिल जब चलती थी वोह तेज, तो धड़कन तेज हो जाती थी हमको देख यह तनहा सड़के भी खुश हो जाती थी घूमते पहिये , झूमते पहिये गलियों पे छा जाते थे STUNT MAN बनते बनते हम खुद को सुपर हीरो समझने लग जाते थे गलियों से गुजरते थे , हम सडको पे उड़ा करते … Continue reading

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अनकही 2

एक उम्र से मै गुम हुन कहीं और एक उम्र से ही उदास हुन.. एक उम्र से लापता भी हुन और उस उम्र में मिला भी हुन… खोई हुई उन राहों में खोई आज वोह उम्र है मिल पाए जिससे वोह वक़्त कहाँ किसी का वोह अक्स है… मेहनत का वोह पाठ कहीं किताबों में … Continue reading

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अनकही 1

कुछ अनकही बातें आज जुबान पे आई है बिछड़ी यादें ,जब इस दिल की गहरायी छु पाई हैं…. कभी सोचता हूँ उस वक्त के बारे में तो आसमान गले लग जाता है भूली बिसरी यादों में यह दिल न जाने फिर कहाँ खो जाता है…. कभी खवाबों में भी न सोचा था की जिंदगी इस … Continue reading

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